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June - 2016, Tips

 

 

                               

 

ask kirti

 

 

"Tip of the Day"

 

Saturday, 01 October 2016

Aloe-Vera Special

For Skin Care : Aloe vera plant relives the burned skin caused by sunburn. Try this Aloevera benefit to treat sunburn naturally at home.


Sunday, 02 October 2016

Aloe-Vera Special

For Skin Care : Smooth and glowing skin can be achieved with the help of Aloe vera plant. Take advantage of this Aloevera benefit by just rubbing the aloevera gel on your face.


Monday, 03 October 2016

Aloe-Vera Special

For Skin Care : Aloe vera plants are also helpful in curing blisters, insect bites and any allergic reactions, eczema, burns, inflammations, wounds, psoriasis. This Aloevera benefit is a boon for people who have sensitive skin.


Tuesday, 04 October 2016

Aloe-Vera Special

For Skin Care : Try this Aloevera benefit, if you have dry skin. You can get normal, smooth and shiny skin with the oil extract of Aloevera plant. 


 

 

 

 

 

 

 

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"It's not how much we have, but how much we enjoy that makes happiness".

Rights of Women In India

आज भी हमारे देश में बहुत बड़ी संख्या में ऐसी महिलाएं हैं, जो शिक्षित तो हैं, पर उन्हें अपने अधिकार नहीं पता हैं | उन्हें पता ही नहीं कि देश के संविधान और कानून व्यवस्था में ख़ास उनके लिये कितने कानून बनाए गये हैं | मूलभूत संवैधानिक अधिकारों से लेकर अनगिनत कानूनी अधिकारों की एक लम्बी फ़ेहरिस्त है | कानूनी अधिकारों की जानकारी न सिर्फ़ महिलाओं को सक्षम बनाती है, बल्कि अन्याय के ख़िलाफ़ मज़बूती से खड़े होने का हौंसला व आत्मविश्वास भी देती है | यहाँ हमने महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करने की एक छोटी सी पहल की है |


संवैधानिक अधिकार


1.. भारतीय नागरिक होने के कारण महिलाओं को वो सारे अधिकार प्राप्त हैं जो बाकी नागरिकों को मिले हुए हैं | इसके अलावा महिलाओं के विकास के लिये कुछ ख़ास कानून भी बनाये गये हैं, ताकि महिलाएं किसी भी हाल में पुरुषों से पीछे न रहें |

 

 

2.. हमारे संविधान में महिलाओं के मूलभूत अधिकारों को विशेष स्थान दिया गया है | इसमें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार, समानता का अधिकार, स्वतंत्रता का अधिकार, शिक्षा का अधिकार, किसी भी प्रकार के भेदभाव के ख़िलाफ़ अधिकार, स्त्री-पुरुष का भेदभाव किये बिना महिलाओं को समान वेतन का अधिकार, अच्छी सेहत का अधिकार आदि दिये गये हैं |

 

 

3.. महिलाओं को सक्षम और सशक्त बनाने के लिये सरकार ने समय-समय पर संविधान में कई संशोधन किये | महिलाओं को एक बेहतर पब्लिक प्लेटफार्म देने के लिये पंचायत व सभी म्युनिसिपल गवर्मेंट्स में महिलाओं की भागीदारी को एक तिहाई से बढ़ाकर 50% कर दिया गया है | पंचायत व लोकल सेल्फ गवर्मेंट लेवल पर अब पुरुषों के मुक़ाबले महिलाओं की भागीदारी आधी होगी |

 

 

4.. हमारे देश में महिलाओं को मतदान का अधिकार है | यह अधिकार उन्हें तभी मिल गया, जब हमारा देश आज़ाद हुआ जबकि अमेरिका जैसे विकसित देश में भी महिलाओं को मतदान का अधिकार पाने के लिये एक लम्बी लड़ाई लड़नी पड़ी थी |


 

कानूनी अधिकार

 

5.. समानता के अधिकार को व्यावहारिकता का अमली-जामा पहनाने के लिये सरकार ने कुछ अहम क़दम उठाये | वर्ष 2005 में हिन्दू सक्सेशन एक्ट में बहुत ही महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए सभी बेटियों को पिता की सम्पत्ति में बेटों के समान अधिकार दिया | अब हर बेटी का अपने पिता की सम्पत्ति में उतना ही अधिकार है, जितना उसके भाई का है |

 

 

6.. महिलाओं को आर्थिक सहायता का अधिकार मिला है | अपने पति से अलग रहने वाली व तलाकशुदा महिलाओं को अपने भरण-पोषण के लिये किसी पर आश्रित न होना पड़े, इसलिये उन्हें अच्छी तरह से अपनी देखभाल करने के लिये पति से मेंटेनेंस व ऐलीमनी मिलती है | इसके अलावा भुज़ुर्ग माँ के देखभाल की ज़िम्मेदारी उसके बेटे की है | अगर बेटा अपनी ज़िम्मेदारियों को पूरा करने से मुकरता है, तो माँ अपने भरण-पोषण के लिये कानून की मदद ले सकती है | पहले मेंटेनेंस की अधिकतम धनराशि मात्र रु.500/- थी, जिसे वर्ष 2001 में बढ़ाकर पति-पत्नी की हैसियत के अनुसार कर दिया गया है |

 

 

7.. मैटरनिटी लीव महिलाओं का मूलभूत अधिकार है, सरकारी महिला कर्मचारियों के लिये सरकार ने मैटरनिटी लीव की अवधी को 135 दिनों से बढ़ाकर 180 दिन कर दिया है | इसके अलावा वे बच्चे की परवरिश के लिये चाइल्ड केयर की 2 साल की वैतनिक छुट्टियाँ भी ले सकती हैं, जो वो अपनी इच्छा अनुसार बच्चे की 18 साल की उम्र तक कभी भी ले सकती हैं |

 

 

8.. महिलाओं की आवश्यकतानुसार कार्यस्थल का माहौल प्रदान करना हर एम्प्लायर की ज़िम्मेदारी है | उनकी मूलभूत ज़रूरतें जैसे हाइजेनिक टॉयलेट, साफ-सुथरा माहौल आदि | कार्यस्थल पर महिलाओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कुछ गाइडलाइन्स जारी की हैं, ताकि महिलाओं को किसी भी प्रकार के शोषण से बचाया जा सके |

 

 

9.. महिलाओं को हमेशा से ही कमज़ोर वर्ग का हिस्सा माना जाता रहा है | इसलिये उन्हें देश की सेना में स्थाई कमीशन न देकर केवल कुछ साल ही उनकी सेवाएं ली जाती थीं | सेना में स्थाई कमीशन की खातिर सेना की कई महिलाओं ने एक लम्बी लड़ाई लड़ी | जिसके फलस्वरूप सुप्रीम कोर्ट ने महिलाओं के हक़ में फ़ैसला सुनाते हुए उन्हें सेना में स्थाई कमीशन दिया |

 

 

10.. वर्ष 2012 में केन्द्रीय कैबिनेट ने विवाह विधेयक कानून, 2010 में संशोधन कर महिलाओं को पति की सम्पत्ति में समान अधिकार दिया है, पर अभी तक संसद में यह बिल पारित नही हुआ है | अगर संसद में भी यह बिल पारित हो गया तो तलाक़ के बाद पत्नी पति की रिहायशी सम्पत्ति में बराबर की हक़दार होगी |

 

 

11.. दिल्ली हाईकोर्ट ने वर्ष 2011 में एक महत्वपूर्ण फ़ैसला सुनाया | इसके तहत पति से अलग रह रही कामकाजी महिलाएं भी मेंटेनेंस की हक़दार होंगी | अब तक मेंटेनेंस सिर्फ़ उन्हीं महिलाओं को मिलता था, जो अपना भरण-पोषण करने में सक्षम नहीं थीं |

 

 

12.. महिलाओं को घरेलू हिंसा से सरक्षण देने के लिये वर्ष 2005 में घरेलू हिंसा कानून बना | यह कानून घर में होने वाले किसी भी प्रकार की क्रूरता व अत्याचार के ख़िलाफ़ महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करता है | अगर महिला घरेलू हिंसा के ख़िलाफ़ पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराये तो पुलिस इसके ख़िलाफ़ जल्दी व सख्त कार्यवाही करती है |

 

 

13.. लिव-इन-रिलेशनशिप में रहने वाली महिलाओं को भी पत्नी के समान दर्जा देते हुए उसे मेंटेनेंस का अधिकार मिला है | शादी के बगैर अपने पार्टनर के साथ लिव-इन में रहने वाली महिलाओं को पत्नी की तरह सम्मान व मेंटेनेंस का पूरा अधिकार है |  


 

पुलिस सम्बंधी अधिकार

 

14.. सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार किसी भी महिला को सूर्यास्त के बाद और सूर्योदय से पहले गिरफ़्तार नहीं किया जा सकता | पुलिस की यह ज़िम्मेदारी है कि महिलाओं से जुड़ी हर कार्यवाही दिन में ही किसी महिला कांस्टेबल की मौजूदगी में पूरी करे | अगर किसी महत्वपूर्ण केस में सूर्यास्त के बाद महिला की गिरफ़्तारी करनी है, तो पुलिस के पास मजिस्ट्रेट द्वारा जारी स्पेशल लिखित वारंट होना अनिवार्य है |

 

 

15.. अगर किसी महिला को सबके सामने अपना बयान दर्ज करवाने में असहजता महसूस हो रही है, तो उसे पूरा अधिकार है कि वह सिर्फ़ एक पुलिस ऑफिसर और एक लेडी कांस्टेबल के सामने अपना बयान दर्ज करवाए | इससे महिला की प्राइवेसी भी बनी रहती है व उससे जुड़ी कोई भी जानकारी सार्वजानिक नहीं होती |

 

 

16.. बलात्कार व यौन उत्पीड़न की शिकार महिला के लिये एफ़.आई.आर दर्ज करने की कोई समय सीमा नहीं है, वह कभी भी इसकी एफ़.आई.आर दर्ज करवा सकती है | ऐसे मामलों में अक्सर पीड़िता की मानसिक स्थिति ऐसी नहीं होती कि वह तुरंत पुलिस को इस बारे में सूचित कर सके या फिर कई बार परिवार व लोक लाज के बारे में सोचकर महिलाएं तुरंत कोई कठोर क़दम उठाने से हिचकिचाती हैं | इसलिये महिलाओं की मानसिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए उन्हें यह अधिकार दिया गया है |

 

 

17.. महिलाओं को यह अधिकार प्राप्त है कि अगर वह पुलिस स्टेशन जाकर कोई एफ़.आई.आर दर्ज नहीं करवाना चाहती, तो पोस्ट के ज़रिये हेड पुलिस ऑफिसर को अपराध की सूचना देकर एफ़.आई.आर दर्ज करवा सकती है | सूचना मिलते ही हेड पुलिस ऑफिसर उस इलाके के एस.एच.ओ को एफ़.आई.आर दर्ज करने व जुर्म की तहकीक़ात के आदेश भेज देता है | इसके बाद पुलिस जल्दी से जल्दी पीड़िता के घर पहुँच कर उसका बयान दर्ज करती है |

 

 

18.. शोषण की शिकार किसी भी महिला को यह अधिकार है कि पूछताछ के लिये उसे पुलिस स्टेशन नहीं बुलाया जा सकता | पीड़िता का बयान दर्ज करने के लिये पुलिस को उसके घर जाना होगा और एक महिला कांस्टेबल व उसके परिवार वालों की उपस्थिति में उसका बयान दर्ज करना होगा |

 

 

19.. किसी भी मामले में पीड़ित महिला या उससे जुड़ी महिला की पहचान को गुप्त रखा जायेगा, न पुलिस और न ही मीडिया उसका नाम सार्वजनिक कर सकते हैं | अगर कोई महिला का नाम लीक कर देता है तो उसे भारतीय दंड संहिता के तहत सज़ा दी जायेगी |

 

 

20.. अगर किसी महिला को ऐसे अपराध में गिरफ़्तार किया गया है जिसके लिये मौत कि सज़ा का प्रावधान है और ज़मानत नहीं मिलती, फिर भी महिला होने के कारण कोर्ट उसे ज़मानत पर रिहा कर सकती है |

 

 

21.. किसी भी महिला की तलाशी लेने का अधिकार किसी महिला कांस्टेबल को ही है इसके अलावा किसी भी मामले में गिरफ़्तारी के वक़्त पुलिस ऑफिसर के साथ किसी महिला कांस्टेबल का होना अनिवार्य है | अगर ऐसा नहीं है, तो महिला तलाशी देने से वा गिरफ़्तारी से इन्कार कर सकती है |

 

 

22.. महिलाओं को यह अधिकार दिया गया है कि किसी भी कारण यदि उनकी गिरफ़्तारी होती है तो वह अपने मेडिकल परीक्षण की तुरंत मांग कर सकती हैं और मेडिकल परीक्षण के लिये लेडी डॉक्टर का होना ज़रुरी है | अगर किसी कारण लेडी डॉक्टर मौजूद नहीं है तो वो अपने साथ किसी महिला कांस्टेबल की मांग कर सकती है, जो जाँच के दौरान उनके साथ रहेगी |


 

अन्य अधिकार

 

23.. बहुत सी महिलाओं को लगता है कि शादी के बाद नाम या सरनेम बदलने से उनकी पहचान छिन जाती है, ऐसे में महिलाओं को अब पूरा अधिकार है कि वे शादी से पहले वाला सरनेम बनाये रख सकती हैं |

 

 

24.. महिलाओं को फ्री लीगल एड का अधिकार है | अगर कोई महिला अपने उपर हुए अत्याचारों के खिलाफ़ कानूनी लड़ाई लड़ना चाहती है, तो यह उस राज्य की ज़िम्मेदारी है कि वह उस महिला को वक़ील मुहैया कराके उसकी कानूनी लड़ाई में मदद करे |

 

 

25.. गर्भवती महिलाओं को विशेष अधिकार प्राप्त है कि वे किसी भी मेडिकल ट्रीटमेंट या दवाईयों के लिये मना कर सकती हैं | अगर वे चाहें तो सिज़ेरियन, एनेस्थीसिया या पेन मेडिकेशन के लिये मना कर सकती हैं |

 

 30-10-2013 / 15:51:51

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